वाह मोदी जी, गिरावट पर भी विकास की बनावट

लच्छेदार बातों की बेमौसमी बरसात करते हुए विपक्ष पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  ने कम्पनी सैके्रटरीज के गोल्डन जुबली समारोह में विकास के कई काम गिनाए, उनमें से एक प्रमुख था जीडीपी। इस पर उन्होंने कहा कि जीडीपी की दर पहली बार नहीं गिरी, ऐसा पिछली सरकार के शासन के दौरान आठ बार हुआ और वहीं बैठक सैकड़ों प्रबुद्ध लोगों  ने इस बात पर जमकर तालियां पीटीं। यह समझ नहीं आया कि तालियां किसलिए पीटी गर्इं। इस बाार जीडीपी गिरने पर या पिछली सरकार के शासन में आठ बार जीडीपी गिरने पर या फिर हमेशा की तरह मोदी जी की लच्छेदार बातों पर। अगर इसी तरह से अच्छे दिनों के आने की घोषणाएं होती रहीं तो वह दिन दूर नहीं, जब रेलमंत्री कहेंगे कि आज दुर्घटना में तो  100 ही मरे हैं, पिछली सरकार के शासन में तो ऐसा 10 बार हुआ। सरकार की ओर से बयान आएगा कि आज दिन में 10 बलात्कार हुए तो क्या हुआ, पिछली सरकार में ऐसा कई बार हुआ। सुरक्षा की दुहाई देते हुए गृहमंत्री यह भी कह सकते हैं कि आतंकियों ने 50 लोगों की जान ले ली तो इतना शोर क्यों, पिछली सरकार के शासन में ऐसा होता ही रहा है। क्या यही है अच्छे दिनो की शुरुआत? जीडीपी गिरने की आशंका जब मनमोहन सिंह ने पहले ही जताई थी, आज हकीकत दिखने पर पिछले आंकड़ों से गिरावट में विकास का आंकड़ा देखा जा रहा है।
जीएसटी की घोषणा पर तो मोदी ने पूरे विश्व में ढिंढोरा पीट कर खूब तालियां पिटवा लीं, पर व्यापारियों के दिलो दिमाग पर जो हथौड़े पड़ रहे हैं, उसका दर्द शायद उन्हें अब समझ आने लगा है। इसलिए कहा कि बदलाव की संभावनाएं हर जगह हैं। विश्वास कीजिए, जीएसटी तो दूर, जीएसटी रिटर्न भरने में सरलीकरण के दावे करने वाली यह सरकार अगर मोमबत्ती लेकर 130 करोड़ लोगों में घूमे, तो शायद उसे 100 व्यापारी भी नहीं मिल सकेंगे। बशर्ते राजनीति की ओढ़नी न ओढ़ी जाए। आज बिन मौसम मंदी, गिरावट, तकलीफ की जो हवा चलती है, वो कहीं बाहर से नहीं बल्कि अपने ही द्वारा लाई गई है और ध्यान रहे कि काठ की हांडी आग पर एक बार ही चढ़ती है, बार-बार नहीं।

Related Post

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *