photo-5

आ. शांतिसागरजी स्वतंत्रता सेनानी भी थे

आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का कद 6 फुट, 2 इंच था, दिल्ली की घटना है, महाराज जी सुबह जंगल में जाते थे, तो दस लोग उनके साथ चलते। एक दिन पंडित जगनमोहन लाल शास्त्री वहां पहुंच गए और उन्होंने कुछ ऐसी बात देखी, जो महाराज श्री से कह दी। उन्होंने कहा महाराज जी ये लोग आपके साथ भक्ति से नहीं चलते, इसके पीछे बहुत बड़ा रहस्य है, तो महाराज जी ने पूछा – क्या बात है क्यों चलते हैं? तो पंडित जी बोले, ये लोग आपको छुपा कर चलते हैं, तो महाराज जी बोले – मेरे को छुपा कर चलते हैं, क्यों?  पंडित जी बोले – यहाँ ब्रिटिश शासन है और कोई भी नग्न अवस्था में निकल नहीं सकता, इसलिए ये लोग आपको छुपा कर चलते हैं। महाराज जी बोले ‘जब तीर्थंकरों के काल में दिगम्बर साधुओं का विचरण होता था, तो ये अंग्रेजों के काल में क्यों नहीं हो सकता, कानून बदला जा सकता है। धर्म में वो प्रभाव है।’ एक बार मुनि सुधासागर जी महाराज ने चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागर जी के स्मृति दिवस पर कहा था ‘ये गुप्त स्वतंत्रता सेनानी थे, हमारे शान्ति सागर गुरु।’

तो फिर जब महाराज जी को मालूम पड़ा कि ये मेरी नग्नता को छुपाने के लिए मुझे घेर कर चलते हैं, तो उन्होंने अगले दिन कड़क आदेश दिया कि मेरे साथ सिर्फ एक व्यक्ति चलेगा कमण्डलु लेकर। अब गुरु का आदेश था तो लोग कुछ भी नहीं कर सके और चुप रह गए। महाराज जी अगले दिन निकले एक व्यक्ति के साथ, जब महाराज जी चौराहे पर पहुंचे तो पुलिस अधिकारी ने रोका। उन्होंने बताया कि मैं दिगम्बर जैन साधु हूँ, लेकिन वह अधिकारी नहीं माना। महाराज जी ने पूछा – क्या मैं वापस जा सकता हूँ, तो उसने बोला नहीं जा सकते।  फिर महाराज जी वहीं चौराहे पर ध्यान में बैठ गए। ट्रैफिक जाम हो गया, बात एकदम से बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी और सरकार तक पहुंच गई। सरकार ने एक नया कानून पास किया, दिगम्बर साधु को कोई नहीं रोकेगा। इस तरह भारत के सभी प्रान्तों में ये कानून पास हो गया कि दिगम्बर साधु को कोई रोक नहीं सकता।

दिगंबर साधुओं के स्वतंत्र विचरण की आजादी दिलाई आचार्य श्री 108 शांति सागर महाराज ने, हुए न वे स्वतंत्रता सेनानी।

Related Post

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *