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दो महान् संतों का महामिलन – आचार्य श्री विशुद्धसागरजी के संघ से डाॅ. शिवमुनि के संत संघ का हुआ मिलन

महावीर ने कभी पंथ नहीं बनाए: आचार्य श्री विशुद्धसागर
श्वेताम्बर दिगम्बर दोनों महावीर के दूत हैं: डाॅ. शिवमुनि

इन्दौर। 5 सितम्बर। बास्केटबाॅल काॅम्प्लेक्स इन्दौर में जैन परम्परा की दो धाराओं के दो आचार्यों दिगम्बर परम्परा के आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज और जैन श्वेताम्बर परम्परा के डाॅ. शिवमुनि का सोमवार दोपहर महामिलन हुआ। दोनों के संघों में कुल चालीस संत थे। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज विशाल संघ सहित पर्यूषण पर्व के समय हजारों शिविरार्थियों को संस्कारित कर रहे थे। इन्दौर में ही चातुर्मासस्थ डाॅ. शिवमुनि महावीर की महिमा के प्रचार व सामाजिक चुनौतियों का सामना करने और समाज को महावीर के संदेशों के अनुरूप संचालित करने  का मिशन लेकर पहुंचे। दोनों संतों ने इस मद्दे पर सहमति बनाई।
आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज ने कहा कि महावीर ने तो मात्र जैन धर्म प्रतिपादित किया, कभी कोई पंथ नहीं बनाए। विश्व में गणित व व्याकरण जैन दर्शन के ही दिया हैं। जो शब्द है, वह ज्ञान नहीं है और जो ज्ञान है वह शब्द नहीं है। प्रायः ब्रह्मचर्य का आशय स्त्री-पुरुष के बीच दूरी रखने को लेकर किया जाता है, जबकि ब्रह्म में आत्मा की लीनता ही ब्रह्मचर्य है।
डाॅ. शिवमुनि ने कहा समाज भले ही अलग है, लेकिन हम दोनों ही महावीर दूत हैं, महावीर के ध्यान, महावीर की सहनशीलता, महावीर के अहिंसा भाव व आत्मसाधना जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक मंच पर विराजित हैं। शिवमुनि ने कहा कि संतों के जीवन की सफलता मैं तभी मानूंगा जब जन जन हमारी बातों के आधार पर चले, जीवन में  महावीर के संदेशों का समावेश हो। वर्तमान के चुनौती पूर्ण युग में महावीर के संदेशों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर, डाॅ. शिवमुनि जी के 11 सदस्यीय संघ ने सोमवार को दोपहर में रेसकोर्स रोड स्थित बाॅस्केटबाल काॅम्प्लेक्स में जयकारों ने साथ मंगल प्रवेश किया। बास्केटबाॅल काॅम्प्लेक्स में दिगम्बर जैन समाज के संत आचार्य श्री विशुद्धसागर जी का संघ संस्कार शिविर आयोजित कर रहा है। दोनों आचार्य महावीर के जयकारों के बीच जैसे ही मिले, पंडाल भावुक हो गया। दोनों आचार्यों ने एक-दूसरे को साहित्य भेंट किया। पं. रतनलाल शास्त्री ने मंगलाचरण किया। संचालन ब्र. अमित भैया ने किया। टीके वेद, आजाद जैन, मनीष मोना, अमित जैन, संजीव जैन, प्रदीप गोयल, प्रदीप कासलीवाल, विद्वत् परिषद के महामंत्री डाॅ.महेन्द्र जैन मनुज, अनिल भंडारी, अशोक मांडलिक, प्रकाश भटेवरा, रमेश भंडारी, जिनेश्वर जैन, दीपक जैन, हंसमुख गांधी, डाॅ. सुशीला सालगिया भी मौजूद थे।

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