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महामस्तकाभिषेक प्रभावना रथ इन्दौर से प्रारंभ

इन्दौर 15 अगस्त। 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस के अवसर भगवान बाहुबली महामस्तकाभिषेक प्रभावना रथ का प्रारंभ बड़ी धूमधाम व उत्साह के साथ प्रारम्भ हुआ। इसका प्रारम्भ इन्दौर के समोशरण मंदिर कंचनबाग से आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में विशल जन समूह के साथ प्रारम्भ होकर रवीन्द्रनाट्यगृह पहंुचा जहां विशाल सभा का रूप ले लिया। यहां विभिन्न समाजसेवियों ने इसके उद्देश्य व महत्व पर प्रकाश डाला। यह रथ समाज में समरसता, एकता, धर्मप्रचार, श्रमणबेलगोला में प्रत्येक बारह वर्षों में होने वाले भगवान बाहुबली महामस्तकाभिषेक के महत्व को बताने आदि के उद्देश्य से प्रवर्तित किया जा रहा है। श्रमणाचार्यश्री विशुद्धसागरजी ने समरसता, भाईबन्धुत्व का आह्वाहन करते हुए भगवान बाहुबली के गुणों को धारण करने का सन्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में भगवान बनने की क्षमता है। सभा को प्रदीपकुमार जी कासलीवाल, कीर्ति पांड्या, राजकुमार जी पाटौदी, पं सुरेश मारौरा, विद्वत्परिषद् के महामंत्री डाॅ. महेन्द्र मनुज आदि ने संबोधित किया। श्री महेन्द्रकुमार जैन एलआई.सी, सुबोध मारौरा आदि ने  संचालन में सहयोग किया। जैन प्रख्यात विद्वान् पं. रतनलालजी ने रथ पर केशर से स्वस्तिक बना कर प्रारम्भ किया।यह रथ सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भ्रमण करेगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों-नगरों में जहां जो कलश आवंटन समिति और युवा सम्मेलन के संयोजक हैं उन्हें ही रथ प्रवर्तन का प्रभार सोंपा गया है। मुख्य संयोजक श्री हंसमुख गांधी हैं जो कि महामहस्तकाभिषेक महोत्सव के संरक्षक, कलश आवंटन समिति के संयोजक और युवासम्मेलन के मुख्य संयोजक भी हैं। पं सुरेश मारौरा पूर्ण मध्यप्रदेश में रथ के साथ भ्रमण करते हुए रथ का संयोजन कर रहे हैं। यह रथ पहले इन्दौर के विविध 15 स्थानों में 15 दिन तक रथ भ्रमण करेगा। इन्दौर के प्रमुख संयोजक-कीर्ति पाण्डया, संजय जैन 78, ऋषभ पाटनी, देवेन्द्र सोगानी, प्रतिपाल टोंग्या, पदमचंद मोदी और सुभाष सेठिया हैं। श्रवणबेलगोला से विभिन्न प्रान्तों में प्रवर्तन हेतु इस तरह के आठ रथ प्रवर्तित किये गये हैं।

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रगौरव आचार्यरत्न 108 श्री वर्धमानसागरजी महाराज के तत्वावधान व द्विशताधिक पिच्छीधारी श्रमण मुनिराजों के सान्निध्य में श्रवणबेलगोला की विष्वप्रसिद्ध 57 फीट की भगवान बाहुबली की प्रतिमा का पापम्परिक द्वादशवर्षीय महामस्तकाभिषेक 17 फरवरी 2018 से प्रारम्भ होगा। उसके आलोक में श्रवणबेलगोला में विविध कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। जिनमें राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियां, महिला सम्मेलन, पत्रकार सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्राचीन पाण्डुलिपियों की प्रदर्शनी, प्राकृत-संस्कृत संगोष्ठी, विद्वत्सम्मेलन, प्रभावना रथ संचालन आदि कार्यक्रम प्रवर्तमान हैं।
-आशा जैन, परियोजनाधिकारी, इन्दौर

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