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स्वतंत्रता का जश्न नहीं, कुर्बानियों का एहसास कीजिये – मुनि सौरभ सागर

श्री दिगंबर जैन मंदिर कृष्णा नगर में स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर प्रधान महेश चंद जैन एवं चातुर्मास संयोजक श्री मदनसेन जैन ने बताया कि इस अवसर पर स्थानीय महावीर महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। स्थानीय बच्चों ने राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत कविता, नाटक, नृत्य गीत, प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन पंडित संदीप जैन ‘सजल’ शास्त्री हस्तिनापुर ने किया।

परम पूज्य गुरुदेव सौरभ  सागर जी महाराज ने कहा कि आज हम आजादी की फिजाओं में सांस ले रहे हैं, लेकिन यह आजादी हमें किस प्रकार से मिली है, इसे हम भूलते जा रहे हैं। उन वीर पुरुषों की कुर्बानी को हम भूलते जा रहे हैं। आज अभिनय की दुनिया में जीने वाले लोग हकीकत को नहीं पहचानते। स्वतंत्रता को जश्न के रूप में परिर्वितत करते हैं, तो उनकी कुर्बानी का एहसास नहीं होता, मात्र मनोरंजन होता है। ना जाने कितने ही सैनिकों ने पीठ पर नहीं सीने पर गोली खाई। उन्होंने झंडा फहराते- फहराते तोप के गोलों को सहन कर अपनी जान गवाई। भारतीय संस्कृति और सभ्यता का पालन एक महान क्रांतिकारी मंगल पांडे ने भी किया, जब उसने गाय की चमड़ी से युक्त बंदूक की सील खोलने से मना कर दिया और आजादी के लिए 1857 में बिगुल बजा दिया, अपनी खुशी के लिए स्वतंत्रता का आनंद लेना स्वछंदता है।

ईस्ट इंडिया कंपनी ने जब हमारे देश में अपने पांव पसारे, इसका परिणाम यह हुआ कि हमारा देश 300 साल तक गुलाम रहा। आज हम दूसरे देशों का सामान खरीद कर उस देश को समृद्ध बनाते हैं और अपने देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर करते हैं। भारत की स्वतंत्रता में जैनियों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। यदि आज भी संपूर्ण भारतवासी जैनियों के आचरण को अपनाएं तो भारत का संपूर्ण कर्ज दो महीने में ही खत्म हो जाएगा क्योंकि जैनियों का खान-पान, रहन-सहन सब संतुलित और स्वच्छ है।

स्वतंत्रता में जैनियों ने दिया ही दिया है, लिया कुछ भी नहीं है। सेवा-दान आदि में जैनियों का सबसे बड़ा योगदान है। आज पाश्चात्य संस्कृति को नव पीढ़ी अपना रही है, जिससे हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति का ह्रास हो रहा है,अत: भारतीय संस्कृति जो पूरी दुनिया में मानी जाती है अपने आचरण और अपने संस्कारों के लिए, उसे अपनाना चाहिए एवं अपने देश को स्वस्थ बनाने के लिए हमेशा स्थान को स्वच्छ रखना चाहिए अर्थात सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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