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बॉलीवुड बदलने लगा है क्योंकि ‘वैसे’ विषयों पर भी बन रही हैं फिल्में

बॉलीवुड बदल रहा है और वो भी बेहतरी के लिए. मनोरंजन के बहाने से बॉलीवुड की कई आने वाली फिल्में सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार कर रही है. ऐसी ही एक फिल्म है अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’  जो खुले में शौच जैसे विषय पर आधारित है. फिल्म स्वच्छ भारत और निर्मल भारत जैसे अभियानों को केंद्र में रखते हुए ये दिखाती है कि खुले में शौच जाना कैसे आज भी भारत की शर्मनाक सच्चाई बना हुआ और इस स्थिति को हमें अपनी बहू बेटियों की खातिर बदलना होगा.

टॉयलेट एक प्रेम कथा
वर्ष 2016 में आई ‘वॉटर एड’ नामक गैर सरकारी संस्था की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के शहरों में रहने वाली 41 प्रतिशत आबादी अब भी खुले में शौच जाने को मजबूर है ये बांग्लादेश की कुल आबादी के बराबर है
भारत में सिर्फ शहरी इलाकों में ही प्रतिदिन खुले में इतना शौच किया जाता जिससे 8 ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं.’टॉयलेट एक प्रेम’ कथा जैसी फिल्मों के जरिए हालात बदलने की कोशिश की जा रही है. फिल्म में मनोरंजन का तड़का तो है ही साथ ही इस फिल्म के जरिए एक गंभीर संदेश देने की कोशिश भी की गई है.

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