3

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, जजों का वेतन बढ़ाना भूल गई है क्या?

सर्वोच्च न्यायालय के स्टाफ और अधिकारियों को वॉशिंग अलाउंस देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या जजों का वेतन बढ़ना भूल गए? साथ ही कोर्ट ने कहा कि जजों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद नौकरशाहों से भी कम है।

आगे जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस जे चेलेश्वर की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल पी एस नरसिम्हा से सवाल किया कि जजों के वेतन बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव मार्च में ही लाया गया था, लेकिन अब इसपर विचार नहीं किया गया। बता दें कि जजों के वेतन में वृद्धि संसद से बिल पास होने के बाद ही हो सकती है।

गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद नौकरशाही में सर्वोच्च रैंक (कैबिनेट सेक्रटरी) को 2.5 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन के तौर पर मिलते हैं। इसके अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के लिए कई तरह के भत्ते भी हैं।

भारत के चीफ जस्टिस जो कि सैद्धांतिक तौर पर किसी भी अधिकारी से ऊपर का दर्जा रखते हैं लेकिन प्रतिमाह वेतन में सिर्फ 1 लाख रुपए मिलते हैं। चीफ जस्टिस के वेतन में इसके साथ एचआरए और दूसरे तमाम तरह के भत्ते भी शामिल होते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के जज और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को 90 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन के रूप में मिलते हैं। हाईकोर्ट के अन्य जजों को 80 हजार रुपए की सैलरी मिलती है।

Related Post

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *