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गरीबी-तंगी में रहने वाले ‘रैपर’ का बड़ा सपना, ‘गली बॉय’ की दमदार कहानी

‘गली बॉय’ (Gully Boy) कहानी है मुराद की, जो धारावि के छोटे से घर में पला बड़ा है, उसके साथ रहते हैं उसके मां-बाप, दादी और भाई. गरीबी और तंगी में रह रहे मुराद के सपने बड़े हैं पर उनके सामने खड़े हैं उसके हालत, उसके पिता, समाज और उसकी सोच की एक नौकर का बेटा सिर्फ नौकर हो सकता है और कैसे सोच की इन बेड़ियों को पिघलाकर अपने अंदर की आग को अपने रैप में डालकर और समाज की इस सोच को जलाकर बन जाता है रैप स्टार, यही कहानी है गली बॉय की. रैप का मतलब शायद बहुत से दर्शकों को समझ ना आए इसलिए में बता दूं कि किसी भी सोच या कविता को जो बेसिक रिधम के साथ परफॉर्म किया जाता है उससे रैप कहते हैं, अक्सर लोग नारों को प्रोटेस्ट करने के लिए इस्तेमाल किया करते थे और धीरे-धीरे जब इसमें रिधम और बीट्स का इस्तेमाल आया तो इसने रैप की शक्ल ले ली और समाज के आगे प्रोटेस्ट करने के लिए गली बॉय में निर्देशक ज़ोया अख़्तर ने इसी रैप को हथियार बनाकर वार किया है.

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