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प्रेस विज्ञप्ति ( 9 जनवरी 2018 ) विषय : शहीद राजा नाहर सिंह की स्मृति में स्मारक बनवाने के लिए कमांडो सुरेंद्र सिंह ने चांदनी चौक में फव्वारा चौक पर हवन करवाकर स्मारक की नीव रखी I

शहीद राजा नाहर सिंह की स्मृति में स्मारक बनवाने के लिए कमांडो सुरेंद्र सिंह ने चांदनी चौक में फव्वारा चौक पर हवन करवाकर स्मारक की नीव रखी I
देश की आजादी के लिए अनगिनत वीरों ने अपने जीवन का बलिदान दिया है। भारतीय इतिहास में जिन शहीदों का नाम अंकित है, उनमें बल्लभगढ़ रियासत के आजादी के मतवाले शहीद राजा नाहर सिंह का नाम हरियाणा के इतिहास में सदा अमर रहेगा जिन्होंने 1857 की महान क्रांति प्रथम भारतीय संग्राम में अहम् भूमिका निभाई थी I
ऐसे वीर सपूत को पूरा भारत देश सदा सम्मान के साथ याद करता रहेगा और आने वाली पीडियों के दिल में उस महान शहीद की याद बरकरार रखने के लिए दिल्ली छावनी से विधायक कमांडो सुरेंद्र सिंह ने चौधरी ईश्वर सिंह तेवतिया, और पूर्व मेजर ईश्वर सिंह जाकड़ और अन्य लोगों के साथ माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल जी को चांदनी चौक के कोतवाली फव्वारा चौक पर शहीद राजा नाहर सिंह की याद में स्मारक बनवाने के लिए दिनांक 28 दिसंबर 2017 को ज्ञापन सौंपा था जिसके परिणाम स्वरुप दिल्ली सरकार के द्वारा शहीद राजा नाहर सिंह जी की याद में चांदनी चौक के फव्वारा चौक पर स्मारक बनवाया जायेगा जो हमेशा हमे देश की शान में शहीद राजा नाहर सिंह जी की याद दिलाता रहेगा I इस स्मारक की नीव रखने के लिए आज दिनांक 9 जनवरी 2018 को चांदनी चौक के कोतवाली फव्वारा चौक पर कमांडो सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में हवन गया और शहीद राजा नाहर सिंह जी को श्रद्धांजलि दी गई जिसमें अन्य जिसमें डॉक्टर योगानंद शास्त्री पूर्व अध्यक्ष दिल्ली विधान सभा, डॉक्टर अमृता सिंह उपनिदेशक अल्पसंख्यक कल्याण एंड वक़्फ़ बोर्ड, कर्नल हरेंद्र सिंह, श्री जयेंदर कुमार डबास नेता सदन उत्तरी दिल्ली नगर निगम, श्री भारत पंवार पार्षद, श्रीमती उर्मिला राणा पार्षद कादीपुर,  श्री सतवीर सिंह पार्षद, साथ ही भारी मात्रा में अन्य पूर्व सैनिक शामिल रहे I
कमांडो सुरेंद्र सिंह पहले भी देश के सैनिकों के हक़ के लिए लड़ते आये हैं और ऐसे बहुत से सैनिक जिन्होंने देश की सेवा में तथा निष्ठां से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने प्राणो का बलिदान दिया उन्हें शहीद का दर्जा दिलवाने में कमांडो सुरेंद्र सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई और सरकार से उनके परिवार को 1 करोड़ रूपए शहीद सम्मान राशि भी दिलवाई जिनमें मुख्य रूप से ईमानदारी और निष्ठां का परिचय देते हुए शहीद हुए NDMC के सलाहकार एम् एम् खान, दिल्ली पुलिस के शहीद इंस्पेक्टर तथा अन्य कई और वीर शामिल हैं  जिन्होंने देश की शान में अपने प्राण न्योछावर कर दिए I कमांडो सुरेंद्र सिंह एक पूर्व सैनिक होने के नाते सैनिकों का दर्द बेहतर समझते हैं क्योंकि देश की रक्षा के लिए उन्होंने भी कई बड़े आतंकी हमलों से लोहा लेने में मुख्या भूमिका निभाई है जिसमें 26/11 का ताज होटल हमला, कारगिल युद्ध ऑपरेशन पराक्रम आदि शामिल हैं I
प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम जिसे 1857 की महान क्रांति के नाम से जाना जाता है। इसमें बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह अग्रणी क्रांतिकारियों में थे, जिन्होंने बहादुरशाह जफर को दिल्ली का शासक स्थापित करने तथा राजधानी की सुरक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी। वीर सपूत राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी 1858 को लालकिले के सामने चांदनी चौक में ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध विद्रोह के आरोप में फांसी पर लटकाया गया थाI
 उनका बलिदान अनूठा और प्रेरणादायक था। 6 अप्रैल 1821 को महाराजा राम सिंह के घर जन्में नाहर सिंह 18 वर्ष की आयु में 20 जनवरी 1839 को बसंत पंचमी के दिन इनका राज्यारोहण हुआ। मात्र 36 वर्ष की आयु में 9 जनवरी 1858 को फांसी के बाद उनका मृतक शरीर भी अंग्रेजी शासन ने उनके परिजनों को नहीं दिया। अंग्रेजों को भय था कि कहीं उनके मृतक शरीर को देखकर रियासत के लोग भड़ककर शोला न बन जाएं और अंग्रेजों पर कहर बनकर न टूटें। राजा नाहर सिंह न केवल तलवार के धनी थे बल्कि शासकीय कूटनीति में भी दक्ष थे। दिल्ली में दोबारा अधिकार के लिये ब्रिटिश सैनिकों का दबाव बढ़ा तो बहादुरशाह जफर ने नाहर सिंह को दिल्ली की सुरक्षा के लिए बुलावा भेजा। नाहर सिंह दक्षिण दिल्ली पर लोहे की दीवार बन गए। किसी भी फिरंगी को उन्होंने दक्षिण की ओर से नहीं घुसने दिया। आगरा से आती हुई ब्रिटिश सैनिक टुकड़ियों को उन्होंने मौत के घाट उतार दिया। राजा नाहर सिंह लाल किले की रक्षा बल्लभगढ़ से आगे निकलकर कर रहे थे। दिल्ली के तख्त पर दोबारा अंग्रेजी अधिकार हो जाने पर बहादुरशाह जफर बंदी बना लिए गए।  दिल्ली की सड़के रक्त रंजित हो उठी। अंग्रेजों के अत्याचारों से दिल्ली कांप उठी। तब नाहर सिंह बल्लभगढ़ की रक्षा के लिए दिल्ली से वापस आ गए थे। शहीद राजा नाहर सिंह बल्लभगढ़ स्थित ऐतिहासिक महल आज भी राजा व उनके वंशजों की याद दिलाता है।  फरीदाबाद स्थित स्टेडियम का भी नामकरण शहीद राजा के नाम पर हुआ है। राजा नाहर सिंह के महल का भी बल्लभगढ़ में जीर्णोद्वार हो चुका है।

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