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UP: झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही, 40 लोगों को हुआ AIDS

भारत मे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ मिशन (NRHM) के चलते एचआई वी (एड्स) से बचाव में जागरूकता अभियान के लिए केन्द्र सरकार द्वारा करोड़ो रूपये खर्च किये जा रहे है  वही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर आम जनता के स्वास्थ की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, लेकिन उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद की स्वास्थ सेवाओ की हकीकत कुछ और ही है। उन्नाव स्वास्थ विभाग की झोलाछाप डॉक्टरों पर मेहरबानी के चलते उन्नाव में वित्तीय वर्ष 2016 – 17  की एचआईवी जांच में 40 पॉजिटिव मरीज पाये गए, वही वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017- 18 में 27 एचआईवी पाजिटिव मरीज पाये गए।

उन्नाव में एड्स के मरीजो की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है जो की चौकाने वाला है वही सरकारी आकड़ो में लगातार बढ़ोतरी हो रही है इस वर्ष के नवम्बर माह से अबतक में फिर उन्नाव के  बांगरमऊ में 13 और नए एचआईवी पाजिटिव मरीज सामने आने से उन्नाव स्वास्थ विभाग में हड़कंप मचा गया है। वही स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई है आरोप है 4 माह पहले एचआई वी सेंटर जांच कराने पहुचे दंपति ने जांच के दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग के आई सीटीसी विभाग के एड्स के काउंसलर को झोलाछाप डाक्टर की शिकायत की लिखित रूप से की थी।

बांगरमऊ के  पार्षद सुनील ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि अगर ठीक से जांच करवाई जाए तो 500 मामले में सामने आ जाएंगे। आईसीटीसी विभाग के मुख्यचिकित्सा अधीक्षक ने मामले की जानकारी का पत्र जारी उक्त मामले की जाँच मुख्यचिकित्सा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद से कराने को लिखा था जिसमें दंपति की शिकायत के मुताबिक लिखा था कि बांगरमऊ के एक झोलाछाप डॉक्टर यादव, द्वारा एक ही सीरिंज से कई लोगों कोइंजेक्शन लगाने की बात लिखी गई।

ये पूरा मामला उन्नाव के बांगरमऊ कस्बे का है जहाँ एड्स के मरीजों के एका एक बढ़ोतरी सामने आई है। नवंबर-2017 में बांगरमऊ तहसील के कुछ गांवों में एक एनजीओ ने हेल्थ कैंप लगाया था। इसमें जांच के दौरान कुछ लोगों में एचआईवी के लक्ष्यण मिले। बाद में इन्हें जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। जब लोगों की काउंसलिंग की तो पता चला कि क्षेत्र में लोगों का इलाज करने वाला एक झोलाछाप डॉक्टर एक इंजेक्शन का बार-बार इस्तेमाल करता था। कहा जा रहा है कि वो झोलाछाप बार बार एक ही इंजेक्शन का इस्तेमाल करता होगा। उसने किसी एचआईवी संक्रमित मरीज को लगाए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया होगा जिसके बाद और लोगों को भी ये राग हो गया।

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