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बिल देने वाली 123 कंपनियों के पते फर्जी – जीएसटी घोटाला

जीएसटी बिल घोटाले का मामला उलझता जा रहा है। विभाग के सामने 123 कंपिनयां ऐसी सामने आई हैं, जिन्होंने माल की बिक्री दिखाकर उसके बिल जारी किए। लेकिन किस बिल पर किस पार्टी को माल बेचा उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अधिकारियों ने जब बिल देने वाली कंपनियों के पतों पर छानबीन शुरू की तो 123 कंपनियों के पते फर्जी निकले। बिलों पर दिए गए पतों पर कोई भी कंपनी का दफ्तर या फैक्टरी नहीं मिली।

बीते दिनों एडीशनल कमिश्नर सौरव राज ने लुधियाना में केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक से कुछ संदिग्ध कंपनियों की बैंक स्टेटमैंट ली थी। उनमें सैंकड़ों ऐसी कंपनियां मिलीं, जिन्होंने करोड़ों की ट्रांजैक्शन की हुई है। इसी के आधार पर एडीशनल कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर स्टेट टैक्स पवन गर्ग को जांच आगे बढ़ाने के लिए अधिकार पत्र लिखित में दिया।

अधिकारियों ने फुर्ती दिखाते हुए 3 दिन के भीतर हालांकि शनिवार व रविवार की छुट्टी होने के बावजूद 123 कंपनियों की जांच की। इन सबके पते फर्जी निकले। यानी जिन कंपनियों ने माल बेचने के बिल काट रखे हैं उनके सबके पते जाली निकले। इन पतों पर किसी भी कंपनी का आफिस नहीं मिला। माल किस कंपनी को बेचा उसके बारे में भी जानकारी नहीं मिल पा रही।

ध्यान रहे कि पंजाब केसरी ने पहले ही 123 कंपनियों के जाली होने के बारे में जानकारी दी थी और जांच में भी यही पाया गया। लुधियाना के तीनों जिलों के अधिकारी अब ढूंढने में लगे हैं कि इन बिलों पर किस कंपनी ने जी.एस.टी.आर. रिटर्न में परचेज दिखाई है। इन सबमें 75 फीसदी कंपनियां हौजरी व धागे के कारोबार से संबंधित हैं और बाकी कंपनियों में स्टील की खरीद-फरोख्त दिखाई गई है। इस सारे खेल का खुलासा करने में समय तो लगेगा लेकिन अधिकारी गंभीरता से जिस रास्ते पर चल कर जांच कर रहे हैं उसके मुताबिक कोई भी बिल लेने वाली कंपनी बच नहीं सकेगी। इसके अतिरिक्त 200 से ज्यादा और कंपनियां सामने आने की उम्मीद है।

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